गुरुवार, 25 फ़रवरी 2010

हम शिविर में कवि-कथाकार बनाते हैं




                  छत्तीसगढ़ प्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन का युवा रचना शिविर

यह माना जाता है कि कवि – कथाकार व कलाकार जन्मजात होते हैं । लेकिन ऐसा नहीं है । एक रचनाकार बनने के लिये साधना  करनी पड़ती है और विधिवत अध्ययन करना पड़ता है । यह न भी किया जाये तो कवि को कवि बनने से  कोई रोक नहीं सकता लेकिन उसकी रचना में परिपक्वता आने में समय तो लग ही जाता है  । इस उद्देश्य को ध्यान में रख कर हमारे देश के विभिन्न लेखक संघों और साहित्य सम्मेलनों द्वारा लेखक शिविर या रचना शिविर आयोजित किये जाते रहे हैं । स्व. मायाराम सुरजन जी के प्रयासों से मध्यप्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा 27-28 वर्ष पूर्व यह परम्परा प्रारम्भ की गई थी  । इस शिविर का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इस बहाने वरिष्ठ और अनुभवी लेखक नवोदित रचनाकारों के साथ मिल बैठकर बात करते हैं । इन शिविरों में रचना के हर पहलू पर बातचीत होती है ।
हिन्दी के कई ब्लॉगर एवं लेखक इन्ही शिविरों में भाग ले चुके हैं जिनमें फिलहाल तो मुझे कुमार अम्बुज , शरद कोकास  गिरीश पंकज और वन्दना अवस्थी दुबे का नाम याद आ रहा है । शमशेर बहादुर सिंह , हरिशंकर परसाई , हबीब तनवीर , डॉ. मलय , डॉ.कमला प्रसाद , भगवत रावत, राजेश जोशी , उदय प्रकाश ,राजेन्द्र शर्मा  ,धनंजय वर्मा जैसे वरिष्ठ रचनाकारों ने विषय विशेषज्ञों के रूप में इन शिविरों में अपनी भागीदारी दर्ज की है ।
म.प्र .हिन्दी साहित्य सम्मेलन के बाद  अब छत्तीसगढ़ प्रदेश साहित्य सम्मेलन ने भी इस परम्परा को पुन: प्रारम्भ किया है और आगामी 4 मार्च से 7 मार्च 2010 तक दुर्ग ज़िले के बालोद जनपद में ऐसा ही एक रचना शिविर आयोजित किया जा रहा है । सम्मेलन के महामंत्री रवि श्रीवास्तव ,तथा प्रबन्ध मंत्री राजेन्द्र चांडक ने यह जानकारी दी है कि इस शिविर में 40 युवाओं को आमंत्रित किया जायेगा । इन प्रतिभागियों के नाम विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से आमंत्रित किये जा रहे हैं ।
इस शिविर में जो युवा भाग लेना चाहते हैं उनकी आयु  30 वर्ष से अधिक नहीं होना चाहिये । यह ज़रूरी है कि वे कम से कम एक-दो साल से लिख रहे हों और उनमें आगे बढ़ने की सम्भावना और इच्छा हो । दुर्ग से 50 किलोमीटर दूरी पर स्थित बालोद तक उन्हे स्वयं के व्यय से आना होगा । शिविर में चार दिनों तक भोजन एवं आवास की व्यवस्था सम्मेलन द्वारा की जायेगी । उन्हे शिविर में एक अनुशासित प्रशिक्षार्थी की तरह रहना होगा और शिविर के नियमों का पालन करना होगा ।
श्री चांडक ने बताया कि इस शिविर में वरिष्ठ कवि नरेश सक्सेना , कथाकार डॉ. रमाकांत श्रीवास्तव , वरिष्ठ कवि एवं “देशबन्धु” के प्रधान सम्पादक ललित सुरजन , कवि रवि श्रीवास्तव , सहित देश के अन्य साहित्यकार भी नवोदित रचनाकारों के साथ रहकर उन्हे मार्गदर्शन देंगे । इस शिविर में रचना प्रक्रिया पर लेख और चर्चा के सत्र होंगे , समूह चर्चा होगी , समकालीन मुद्दों पर बातचीत होगी , जाने –माने लेखकों की रचनाओं का विश्लेषणपरक अध्ययन होगा , रचना के तत्व, रचनाकार की आंतरिक स्वतंत्रता , रचना की भाषा , कल्पना व  बिम्बों का प्रयोग जैसे विषयों पर चर्चा होगी साथ ही वरिष्ठ रचनाकारों का काव्य व कहानीपाठ होगा तथा शिविरार्थी युवाओं की रचनाओं पर आत्मीय बातचीत होगी ।
यदि आप इस रचना शिविर में भाग लेना चाहते है तो देर न करें वरिष्ठ रचनाकारों व ब्लॉगर्स से भी निवेदन है कि वे युवाओं को इस कार्य हेतु निर्देशित करें । श्री राजेन्द्र चांडक से मोबाइल नम्बर 9425207425  या रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ प्रदेश साहित्य सम्मेलन कार्यालय के दूरभाष क्रमांक 0771-2292011  पर सम्पर्क करें । ई मेल पता है – info@msfraipur.com
मैं अपनी ओर से केवल इतना ही कहना चाहूंगा कि मैने 1984 में ,जबलपुर में सम्मेलन के दस दिवसीय “ कविता रचना शिविर “ में भाग लिया था और उन दस दिनों में जो कुछ मैने पाया उसे दस वर्षों मे भी नहीं पा सकता था । शीघ्र  ही इस ब्लॉग पर उस शिविर के अनुभव साथ ही रचना के विभिन्न तत्वों पर अपनी बातें ,और नवोदित रचनाकारों के लिये आवश्यक टिप्स एक लेखमाला के रूप में  प्रस्तुत करूंगा ।
आपका – शरद कोकास

16 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

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  2. छतीसगढ़ में इस तरह के साहित्य सम्मलेन होते हैं यह जानकर बहुत अच्छा लगा .......शरद जी, इस जानकारी के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !!

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  3. यह बड़ी अच्‍छी परंपरा है. ऐसे शिविर सब जगह नई उर्जा के साथ चलाए जाने चाहिए.

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  4. रचना शिविर....उफ़..पढ के ही जैसे मैं २७ साल पहले चित्रकूट में आयोजित हुए कहानी-रचना शिविर में पहुंच गई...उस शिविर में कुल अस्सी नवोदित कथाकारों ने भाग लिया लिया था. दस-दिवसीय ये रचना-शिविर मेरे लिये स्वप्नलोक से कम नहीं था.वरिष्ठ कथाकार जिन्हें हम केवल पढते थे, हमारे साथ वे, न केवल रहे, बल्कि कहानी की बारीकियां भी समझाईं. उस शिविर में अब्दुल बिस्मिल्लाह, शशांक, धनंजय वर्मा, काशीनाथ सिंह, अजित पुष्कल, सनत कुमार, स्वयं प्रकाश, भाउ समर्थ, डा. कमला प्रसाद, मायाराम सुरजन, और डा. नामवर सिंह जैसी हस्तियों का साथ और मार्गदर्शन मिला. बाद में नाट्य शिविर में हबीब तनवीर साहब का मार्गदर्शन. कितने कीमती हैं वे दिन...धरोहर की तरह. यदि छत्तीसगढ में फिर ऐसी शुरुआत की जा रही है तो ये स्वागत-योग्य है.

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  5. ....यह एक सराहनीय आयोजन है इस आयोजन की उपलब्धियां "मील का पत्थर" बनें जो नये लोगों के लिये पथप्रदर्शक व मार्गदर्शक का कार्य करें .... अग्रिम शुभकामनाएं !!!!

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  6. भैया.... मैं तीस से ऊपर हूँ ...पर पैंतीस से कम.... फिर भी मैं युवा नहीं हूँ.... ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ ..... और मैं तीस साल से लिख रहा हूँ.... क्या मैं भाग ले सकता हूँ....? युवा की उम्र तो पैंतालीस तक होती है ना .... भैया....

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  7. अजी हम २x३० से कुछ कम है, क्या हमे दुगनी फ़ीस देनी पडेगी..:)
    बहुत सुंदर युवाओ को इस से बहुत लाभ होगा.
    धन्यवाद

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  8. @ महफूज़ तुम अपनी बात कर रहे हो .. मै भी यही कहता हूँ लेकिन मुझे अब शिविर में प्रशिक्षण देने के लिये बुलाते है , मैं कहता हूँ मुझे अभी सीखना है तो कहते हैं "क्यों मज़ाक करते हो " । बताओ अब मैं क्या करूँ । खैर चिंता मत करो ..अपन ब्लॉग में ही यह शिविर चलायेंगे ..कैसा है आयडिया ?
    @ भाटिया जी ..आप से क्या कहें ..काश आप आ पाते तो यह छत्तीसगढ़ का क्या अंतर्राष्ट्रीय शिविर हो जाता ।
    @वन्दना जी ,धन्यवाद .. आपके अनुभव से हम सभी भविष्य में लाभानवित होंगे ।

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  9. ...होली की लख-लख बधाईंया व शुभकामनाएं !!

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  10. बहुत ही सुन्दरता से आपने प्रस्तुत किया है! बढ़िया जानकारी मिली!

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  11. पहली बार आया हूँ इस गली
    बहुत अच्छा लगा



    कभी अजनबी सी, कभी जानी पहचानी सी, जिंदगी रोज मिलती है क़तरा-क़तरा…
    http://qatraqatra.yatishjain.com/

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